सार्वजनिक यूनिवर्सिटीने लिबरल आर्ट्स के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सार्वजनिक कॉलेज ऑफ लिबरल आर्ट्स (SCLA) की स्थापना की है। सार्वजनिक यूनिवर्सिटी के इस नए कॉलेज में मनोविज्ञान (Psychology) और अर्थशास्त्र (Economics) में ऑनर्स कार्यक्रम प्रारंभ किए गए हैं। महाविद्यालय का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण विकसित करना है जो तार्किक सोच, विभिन्न विषयों के समन्वय पर आधारित अध्ययन और संपूर्ण विकास को प्रोत्साहित करे।
महाविद्यालय की स्थापना के अवसर पर सार्वजनिक यूनिवर्सिटीद्वारा 6 और 7 अगस्त को दो दिवसीय उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। पहले दिन नानपुरा स्थित टी. एंड टी. वी. परिसर में सार्वजनिक कॉलेज ऑफ लिबरल आर्ट्स के परिसर का औपचारिक उद्घाटन किया गया, जबकि दूसरे दिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता डॉ. स्मृति बलसारी द्वारा “बिहेवियरल इकोनॉमिक्स: एप्लिकेशन्स इन हेल्थकेयर” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि सार्वजनिक यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष एवं सार्वजनिक एजुकेशन सोसायटी के चेयरमैन श्री आशीष वकील थे। इस अवसर पर सार्वजनिक यूनिवर्सिटी के प्रोवोस्ट डॉ. किरण पंड्या, सार्वजनिक एजुकेशन सोसायटी के उपाध्यक्ष श्री किशोर देसाई, उपाध्यक्ष श्री अजीत शाह, SCLA की वर्किंग कमेटी के चेयरमैन श्री निक्की क्रिस्टी, SCLA के प्रभारी प्राचार्य डॉ. जयेश देसाई, प्रबंधन समिति के सदस्य, विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षाविद्, संकाय सदस्य, विद्यार्थी तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना और पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। स्वागत संबोधन में डॉ. जयेश देसाई ने कहा कि यह नया परिसर अध्ययन, संवाद और बौद्धिक विकास का एक सशक्त केंद्र बनेगा। श्री निक्की क्रिस्टी ने लिबरल आर्ट्स शिक्षा के माध्यम से रचनात्मकता, नवीन प्रयोग और उत्तरदायी नेतृत्व के विकास के महत्व पर बल दिया। अपने संबोधन में डॉ. किरण पंड्या ने विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया जिसके अंतर्गत शैक्षणिक उत्कृष्टता, विभिन्न विषयों के समन्वय पर आधारित शिक्षा और वैश्विक स्तर की शिक्षा पर आधारित संस्थानों का निर्माण किया जा रहा है। अध्यक्षीय संबोधन में श्री आशीष वकील ने कहा कि सार्वजनिक कॉलेज ऑफ लिबरल आर्ट्स यूनिवर्सिटी के उस उद्देश्य को पूरा करने में योगदान देगा, जिसका लक्ष्य बौद्धिक रूप से जिज्ञासु, सामाजिक रूप से जिम्मेदार और शोध-आधारित तथा समग्र शिक्षा के माध्यम से आज के समय की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम विद्यार्थियों की नई पीढ़ी तैयार करना है।
दूसरे दिन आयोजित डॉ. स्मृति बलसारी का विशेषज्ञ व्याख्यान SCLA की शैक्षणिक सोच के विभिन्न विषयों के समन्वय वाले दृष्टिकोण को दर्शाता था। डॉ. बलसारी ने अपनी स्कूली और कॉलेज की शिक्षा सूरत में प्राप्त की और इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में उच्च शिक्षा एवं शोध कार्य किया। उन्होंने विद्यार्थियों को यह प्रेरणा दी कि समर्पण, सुनियोजित करियर नियोजन और निरंतर सीखने की आदत के माध्यम से वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है।
अपने व्याख्यान में डॉ. बलसारी ने बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के माध्यम से मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र के आपसी संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दोनों विषय व्यक्तिगत निर्णयों, सार्वजनिक नीतियों और आर्थिक निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहेवियरल इकोनॉमिक्स मनुष्य को पूर्णतः तर्कसंगत निर्णय लेने वाला मानने वाली पारंपरिक आर्थिक अवधारणा को चुनौती देता है और यह दर्शाता है कि मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाएँ, भावनाएँ, सोच से जुड़े पूर्वाग्रह और सामाजिक प्रभाव मानव व्यवहार को किस प्रकार आकार देते हैं।
उन्होंने ड्यूल प्रोसेस थ्योरी, प्रॉस्पेक्ट थ्योरी, प्रेज़ेंट बायस, ह्यूरिस्टिक्स, चॉइस आर्किटेक्चर, सोशल नॉर्म्स तथा लिबर्टेरियन पैटरनलिज़्म जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर विस्तार से जानकारी दी। स्वास्थ्य सेवा के संदर्भ में उन्होंने बताया कि बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के सिद्धांतों का उपयोग गैर-संचारी रोगों की रोकथाम तथा स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में प्रभावी रूप से किया जा सकता है। डिमेंशिया को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने समझाया कि प्रमाण-आधारित उपायों के माध्यम से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है, साथ ही सार्वजनिक नीति में नैतिक पहलुओं का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है।
इस व्याख्यान में नागरिक समाज के चुनिंदा प्रतिनिधि, संकाय सदस्य तथा सार्वजनिक विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के 150 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक नीति और आर्थिक निर्णय-निर्माण में बिहेवियरल इकोनॉमिक्स की बढ़ती भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
इस अवसर पर डॉ. किरण पंड्या ने कहा, “हमारे शिक्षकों और विद्यार्थियों के निरंतर समर्पण के साथ हमारा लक्ष्य सूरत में ऐसे शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण करना है जो ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों के समकक्ष स्थापित हो सकें।”
डॉ. जयेश देसाई ने कहा कि यह व्याख्यान नवस्थापित महाविद्यालय की शैक्षणिक सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस सत्र ने विद्यार्थियों को न केवल बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के व्यावहारिक अनुप्रयोगों से परिचित कराया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि सूरत में शिक्षित विद्यार्थी भी उचित करियर नियोजन, समर्पण और दृढ़ता के बल पर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों तक पहुँचने का सपना साकार कर सकते हैं।
दो दिवसीय उद्घाटन कार्यक्रम ने सार्वजनिक कॉलेज ऑफ लिबरल आर्ट्स की उस व्यापक शैक्षणिक सोच को स्पष्ट किया, जिसके अंतर्गत वैश्विक दृष्टिकोण, विभिन्न विषयों के समन्वय पर आधारित अध्ययन, बौद्धिक उत्कृष्टता और आज की चुनौतियों के साथ सार्थक संवाद को विद्यार्थियों के शैक्षणिक अनुभव का अभिन्न अंग बनाया जाएगा।
